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Franceपेरिस, 21 नवंबर (न्यूज इंडिया)-पेरिस हमले के बाद फ्रांस में मुस्लिम समुदाय खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा है। इस आतंकी घटना ने देश के अन्य समुदायों की तरह मुस्लिमों को भी आहत और नाराज किया है। वे इसकी निंदा कर रहे हैं। इस हमले में मारे जाने वालों और घायलों में मुस्लिम शामिल हैं।
लेकिन अन्य फ्रांसीसियों के विपरीत कुछ मुस्लिम अतिरिक्त दबाव महसूस कर रहे हैं। वे मानते हैं कि उनके मजहब इस्लाम का हिंसक कट्टरपंथ से कोई वास्ता नहीं है, लेकिन उन्हें दुख है कि उनके और आईएस के हत्यारों के बीच कुछ गैर-मुस्लिम कोई अंतर नहीं देख पाते। हमले के बाद मुस्लिमों पर हमले की एकाध घटनाएं हुई हैं। बेशक ऐसे मामले दुर्लभ रहे हैं, लेकिन इससे यह संकेत मिला है कि कुछ लोग तमाम मुस्लिमों को एक ही पल्ले में रखकर देख रहे हैं, जो चिंताजनक है।
यहां की ग्रैंड मस्जिद में नमाज पढ़ने जा रही युवती सोराया मोउमेन ने कहा, सड़कों पर हम डरे हुए हैं। हम महसूस कर रहे हैं कि लोग सोचते हैं कि सारे मुस्लिम आतंकी हैं। एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला सामिया माहफोउदिया ने कहा, बगल से गुजरते लोग मुझे ऐसे देखते हैं मानों वे कह रहे हों कि दफा हो जाओ। चार दशक से अधिक समय से फ्रांस में रह रहे अहमद अल म्जिओउजी ने कहा, पेरिस हमले के बाद मैंने लोगों को मुस्लिमों को घूरते हुए देखा है मानों वे ‘कोई अजूबा’ हों।
फ्रांस में इस्लामोफोबिया अर्थात इस्लाम को लेकर भय पर नजर रखने वाले एक समूह ने कहा कि पेरिस हमले के बाद नए सिरे से घृणा अपराध के मामले सामने आए हैं। हालांकि ये उतने बड़े पैमाने पर नहीं हैं जितने जनवरी में शार्ली एब्दो पत्रिका के दफ्तर पर आतंकी हमले के बाद देखे गए थे। गृह मंत्रालय के अनुसार, देश के मार्सिले शहर में एक मुस्लिम महिला और एक यहूदी स्कूल के शिक्षक पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ जगहों पर मुस्लिम सभाओं और दुकानों को निशाना बनाया गया। जबकि कुछ शहरों में दीवारों पर मुस्लिम विरोधी और नस्लीय नारे लिखे पाए गए। गौरतलब है कि फ्रांस पश्चिमी यूरोप में सर्वाधिक मुस्लिम व यहूदी आबादी वाला देश है।

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